चलो कुछ वक़्त निकाला जाए

चलो कुछ वक़्त निकाला जाए
भूले बिछड़े गीतों को फिर से दोहराया जाए
रोती आंखों को अपनी शरारतो से फिर से हसाया जाए
दीवाली में दिये गैरो को अपना बनाने के लिए जलाये
खुशिया सबको बाट सबको सुकून के कुछ पल दिए जाय
बचपन जैसी शैतानी फिर से कर दूसरो के घरो की रंगोली मिटाई जाए
सब को अपना मान खुशबू बिखेरी जाए
चलो इस दीवाली कुछ अलग किया जाए
चलो कुछ वक़्त निकाला जाए


Love poetry





ASHI'S POETRY







मेहनत

लिख के कुछ शब्द कोई यू ही महान नही बन जाता,
बहुत मेहनत लगती है मंजिल तक पहुचने में,


Relationship

मुश्किल में है इंसान, खुली हवा से धरती मुस्कुराई है, अब जा के कही धरती को,  सुकू की सांस आई है।।।

thought